मसूरी में 250 विद्यार्थियों ने जाना—कैरियर चुनना केवल पेशा चुनना नहीं, स्वयं को पहचानने की शुरुआत है
मसूरी | 5 अक्टूबर 2026
भविष्य कभी दरवाजे पर दस्तक देकर नहीं आता।
वह धीरे-धीरे हमारे आज के फैसलों में आकार लेता है—कभी किसी बच्चे के पूछे गए सवाल में, कभी किसी शिक्षक की सलाह में और कभी उस क्षण में, जब एक विद्यार्थी पहली बार खुद से पूछता है—“मैं क्या बनना चाहता हूँ?”

लेकिन बदलती दुनिया में शायद यह सवाल भी बदल रहा है।
अब सवाल केवल यह नहीं कि क्या बनना है?
सवाल यह भी है कि किस दिशा में बढ़ना है, कौन-से कौशल सीखने हैं और अपनी रुचि तथा क्षमता को भविष्य की संभावनाओं से कैसे जोड़ा जाए।
इसी सोच को केंद्र में रखते हुए अखिल महिला समिति, मसूरी, जो All India Women’s Conference (AIWC), Head Office, New Delhi से संबद्ध है, द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को शिशु मंदिर स्कूल, मसूरी में कक्षा 10वीं, 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए कैरियर परामर्श एवं कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में लगभग 250 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जब सवाल “क्या बनोगे?” से आगे बढ़कर “किस दिशा में बढ़ोगे?” हो जाए
आज का रोजगार संसार कुछ दशक पहले की दुनिया जैसा नहीं है।
नई तकनीकें नए पेशे पैदा कर रही हैं, पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है और कई ऐसे कौशल महत्वपूर्ण हो रहे हैं, जिनके बारे में पिछली पीढ़ियों ने शायद सोचा भी नहीं था।
ऐसे समय में विद्यार्थियों के लिए कैरियर परामर्श केवल विकल्पों की सूची देना नहीं, बल्कि संभावनाओं को पहचानने की दृष्टि देना भी है।
कार्यशाला का संचालन शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत नैसकॉम फाउंडेशन, देहरादून के विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
श्री गिरिश, सुश्री आकांक्षा पांडे एवं सुश्री वर्षा ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कैरियर के विभिन्न अवसरों, कौशल विकास तथा अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य की आकांक्षाओं के अनुरूप उचित विकल्प चुनने के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
क्योंकि हर विद्यार्थी की मंजिल एक जैसी नहीं होती।
और शायद शिक्षा की सबसे बड़ी खूबसूरती भी यही है—
वह सभी को एक जैसा बनाने के लिए नहीं, अपनी अलग क्षमता पहचानने के लिए तैयार करती है।
कक्षा में सिर्फ सुनने वाले नहीं, सवाल पूछने वाले विद्यार्थी
विशेषज्ञों का स्वागत एवं परिचय स्थायी समिति की सदस्य श्रीमती कमल शर्मा द्वारा कराया गया।

कार्यक्रम में अध्यक्ष श्रीमती भारोसी रावत, सचिव श्रीमती गीतू मनचंदा एवं कोषाध्यक्ष श्रीमती उषा धनाई की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपने भविष्य के प्रति जागरूक रहने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला की विशेषता यह रही कि विद्यार्थी केवल श्रोता बनकर नहीं बैठे रहे।
उन्होंने विशेषज्ञों से संवाद किया, अपने कैरियर और भविष्य से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे तथा अपनी जिज्ञासाओं के समाधान तलाशे।
विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें व्यावहारिक एवं उपयोगी सुझाव दिए।
विद्यार्थियों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई।
क्योंकि कभी-कभी भविष्य की गंभीर बातचीत के बीच एक सहज वातावरण भी सीखने को आसान बना देता है।

समिति की सहभागिता
कार्यक्रम में अखिल महिला समिति, मसूरी की सदस्य श्रीमती आशा गुप्ता, श्रीमती मीरा गुप्ता, श्रीमती हरजिंदर वढेरा, श्रीमती रमनजीत कौर, श्रीमती उषा धनाई, श्रीमती रजनी एकांत, श्रीमती किरण त्रिपाठी, श्रीमती उषा मेहरा एवं श्रीमती अनीता बत्रा भी उपस्थित रहीं।
इनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को संगठनात्मक सहयोग और सहभागिता का आधार प्रदान किया।




एक विद्यालय, एक सहयोग और एक साझा उद्देश्य
किसी भी शैक्षिक पहल की सफलता केवल मंच पर दिखाई देने वाले चेहरों से तय नहीं होती।
उसके पीछे कई अदृश्य हाथ होते हैं—विद्यालय का सहयोग, व्यवस्थाओं की तैयारी और ऐसा वातावरण जिसमें विद्यार्थी बिना संकोच अपने प्रश्न पूछ सकें।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शिशु मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य श्री मनोज रयाल जी का विशेष सहयोग एवं योगदान रहा।
अखिल महिला समिति, मसूरी ने उनके सहयोग और सकारात्मक सहभागिता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
कैरियर की दुनिया में सबसे जरूरी कौशल—खुद को समझना
कार्यक्रम ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और सफल रहा।
विद्यार्थियों को कैरियर के विभिन्न अवसरों तथा भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी और मार्गदर्शन मिला।
लेकिन शायद इस तरह की कार्यशालाओं का वास्तविक मूल्य केवल उस जानकारी में नहीं होता जो विद्यार्थी अपने साथ घर ले जाते हैं।
वास्तविक मूल्य उस एक नए सवाल में होता है जो उनके भीतर जन्म लेता है—

“मैं अपनी क्षमता का सबसे बेहतर उपयोग कहाँ कर सकता हूँ?”
आज की दुनिया में डिग्री महत्वपूर्ण है, लेकिन अकेली डिग्री पर्याप्त नहीं।
कौशल आवश्यक हैं, लेकिन केवल कौशल भी पर्याप्त नहीं।
और अवसर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अवसर पहचानने के लिए दृष्टि चाहिए।
इसीलिए भविष्य की शिक्षा शायद तीन चीजों के बीच संतुलन का नाम है—
ज्ञान। कौशल। और आत्मपहचान।
शताब्दी से भविष्य की ओर

अखिल महिला समिति, मसूरी के लिए यह वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उसका शताब्दी वर्ष है।
एक शताब्दी केवल सौ वर्षों का बीत जाना नहीं है।
यह इस बात का प्रमाण भी है कि समाज की सेवा करने वाली कोई संस्था समय के साथ अपना उद्देश्य कैसे जीवित रखती है और बदलते युग की जरूरतों के अनुसार अपनी भूमिका को कैसे विस्तार देती है।
एक ओर समिति अपनी सौ वर्ष की यात्रा को देख रही है, तो दूसरी ओर आज के विद्यार्थी उस भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जिसकी शक्ल अभी पूरी तरह दिखाई भी नहीं देती।
यही शायद पीढ़ियों के बीच सबसे सुंदर संवाद है—
एक पीढ़ी अपने अनुभव सौंपती है,
दूसरी पीढ़ी उन अनुभवों से अपना भविष्य बनाती है।
शताब्दी वर्ष के इस गौरवपूर्ण अवसर पर अखिल महिला समिति, मसूरी ने समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए ऐसे उपयोगी, ज्ञानवर्धक और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
समिति का उद्देश्य विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन, अवसर और आवश्यक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।
और शायद किसी भी समाज के लिए इससे बड़ी निवेश की कोई दूसरी परिभाषा नहीं हो सकती—
आज के बच्चे जब अपने भविष्य को समझना शुरू करते हैं,
तभी किसी शहर, समाज और देश का भविष्य आकार लेना शुरू करता है।

मसूरी में 5 अक्टूबर की यह कार्यशाला शायद एक दिन का कार्यक्रम थी।
लेकिन जिन 250 युवा मनों में इसने कोई नया सवाल, कोई नई संभावना या कोई नई दिशा जगाई—उनके लिए यह आने वाले कई वर्षों की शुरुआत हो सकती है।
— AntarSaga™
Tales from the Quiet Depths
